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7 Feb 2012

धरती

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तूजेह बनाया गया है मेरे लीये
तुं अबसे पहेले खुदाके सपनोमे बसती थी

तुं बनके हकिकत आ गई है इस ब्रहांडमे

तुं चमकती परी जैसी, फूलो जैसी महेकती
तुं बीज़को उगाती तुं पौधोको सेहलाती
तेरे अंदर खज़ाने भरे हीरे मोती
और इन्सानका सबसे मनपसिंदा तेल
तुं सबको बांटती रेहती…
खेत खलियान भरे पडे..
फल फूल तरकारी सबके लिये सबके लिये
किसीसे बैर नही किसीसे उंच नीच नही
जब ईन्सान जीके थक जाता है
अपनी आगोशमे ले लेती है…
अनगीनत मुर्दे है तेरी आगोशमे
तेरी सबरकी इन्तेहा नही..तेरे प्यारकी इन्तेहा नहीं
मांसे भी प्यारी है मेरी धरती मां
लेकीन हमने तेरा क्यां किया?
तेरी छाती पर रेखाये खींची
कही भारत कही इरान बनाया
बमके धमाकोसे तेरी आगोशको ज़ख्मी किया
तेरे बहते धारेको मौड दिया
तेरे जंगल काटके रस्ते बनाये
तेरे पर पडती अमृतधाराको रोक दिया
फिर भी तुं सबरसे देती रहती है
कभी तुं रूठती नहीं
कभी तु सूरजके इर्दगिर्द घुमना छोडती नहीं
कभी चांदको अपने आकर्षणसे नीकालती नही
तुं मेरे लिये कितने दुख जेलती है
तूजेह बनाया गया है मेरे लिये
तुं अबसे पहेले खुदाके सपनोमे थी कही
सपना विजापुरा
१-२३-२०१२

8 Oct 2011

तन्हाइयां

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तेरी चाहत मिले मुजेह यह मेरा नसीब नहीं
मेरी चाहत मिले तुजेह यह तेरा नसीब नहीं
खुदाने बनाये अपने अपने नसीब मुख्तलिफ
न तुं मेरा नसीब है न मै तेरा नसीब हुं

जब शामके रंग उतर चुके तब आये
जब रातके अंधेरे उतर आये तब आये
आंखोने इन्तेजार छोड दिया तब आये
जब आरज़ुने दम तोड दिया तब आये


लोग कहते है सुननेकी आदत डाल
दिल हि दिलमे रोनेकी आदत डाल
अल्फाज़ खंज़रकी तरह उतरते है सिनेमे
मुर्दा बनके तुं जिनेकी आदत डाल

जिनकी सुबह आंसुओसे शुरु होती है
जिनकी शाम अंधेरोमे खो जाती है
कहिये ऐसे लोग कहा जाते होगे?
जिनकी जिंदगी बेवज़ह गुज़रती है

ख्वाबोके ताज़महल तूटते लब्ज़ोसे
रिश्तोके शिशमहल तूटते लब्ज़ोसे
‘सपना’ तुं बस खमोश हो जा अब
दिलोके नाज़ुक तार तूटते लब्ज़ोसे

सज़देसे सर नहीं उठाउंगी
मै खाली हाथ नहीं जाउंगी
ऐ खुदा तुं है करीम बडा
करम कर वरना मर जाउंगी

सपना विजापुरा
१०-०७-२०११

22 Jun 2011

महोबत

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अब नहीं है तेरा ईन्तेज़ार
अब नहीं है यह दिल बेकरार
क्या कही धडकन बंध हो गई
अब नहीं है सांसोकी  रफतार


दिल जब बसमे नहीं तो कोई क्या करे?
जब तुमसे महोबत है तो कोई क्या करे?
पता है कभी भी  न होगा अपना मिलन
फिर भी दिल तुम्हे  मांगे तो कोई क्या करे?

भीनी भीनी बारिश सी तेरी याद
खुश्बुकी तरह महेकती तेरी याद
जैसे कोई जन्नतकी गलीयोसे गुज़्ररे
पंछीकी तरह चहेकती तेरी याद.

मधूर मधूर है अपने रिश्ते
दिलको बहेलाते है यह रिश्ते
दिलको सेहलाते है यह रिश्ते
मीठे मीठे मुलायमसे रिश्ते.

तुं नज़रके सामने नहीं फिरभी
तेरी तस्वीर दिखाई देती है
अब नही मौतका डर मुज़ेह
मौतमे जिंदगी दिखाई देती है

तुं नही है तो क्या है
तेरी याद तो साथ है
एक यह चीज़ है जीसे
कोई नही छीन सकता है.

सपना विजापुरा
६-२१-२०११

19 Apr 2011

छोड दिया

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तुजेह   चाहके चाहना छोड दिया
किसीको अपना मानना छोड दिया

अब क्यां लेना  देना हैं सांसोसे
जीते जी  मैने भी जीना छोड दिया


तेरी चहेक जो गई जिंदगीसे
परिंदोने भी गुनगुना छोड दिया

तुं जहां है बस खुश ही होगा,
तेरे बारेमे पूछना छोड दिया

जबसे मिला है जामे कवसर
हमने  मयखाना छोड दिया

मरज़ीके मुताबिक क्यां होगा
सपनाने दिलको डाटना छोड दिया..

सपना विजापुरा
४-१८-११

28 Mar 2011

सिराते मुस्तकीम

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ऐ खुदा तु है मेरी रगे-जां तक
बात मेरी पहोंची है आसमां तक

क्या करु मीन्नते गुज़ारिशे मै
जान लेता है  मेरे दिलकी बात तक


मेरे खुदा तेरी शानका क्या केहना?
ज़मीन तेरी हकुमत तेरी आसमान तक

तु ही बता क्या करु तुज़ेह रीझानेको
फरीश्तोको केह दो ले जाये जन्नत तक

नहीं टाल सकती तेरी कोई बात ऐ खुदा
ईश्क है मुज़ेह तुमसे इन्तेहा तक

गर्दिशोमे है तु ही पार लगाना इसे
तु ही पतवार है मेरी कश्तीका किनारे तक

सब भले छोडके जाये मुज़ेह तन्हा
तु ना छोडेगा मुज़ेह भरोसा है गले तक

नहि पता है मुज़ेह भला क्या बुरा क्या
पकड सपनाकी उंगली सिराते मुस्तकीम तक

सपना विजापुरा
सिराते मुस्तकीम= मंज़ीले मक्सुद= सीधा रस्ता

18 Mar 2011

दर्द

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कयामतमे होंगी मुलाकात हमारी
खूब गीले शीकवे करुंगी अल्लाहसे
तब पूछुंगी तडपना मेरी किस्मत थी
या फिर तडपाना उनकी फितरत?

क्यों तेरी तस्वीर सामनेसे हटती नहीं
तेरे   बीना अब तो जिंदगी गुज़रती नहीं
माना तुज़े चाहके बडा गुनाह किया है
फिरभी तेरी महोबत दिलसे मिटती नहीं


दिलमे एक दर्द सा रहेता है
दिल कबसे बेकरार सा है
मिटती नही है दिलकी खलीश
यह मर्ज़ लाईलाज़ सा लगता है

जो कभी हुआ नहीं उसे भूला ना पाई
जो कभी होना नहीं उसकी तमन्ना है
तुं हकीकत है कोई ‘सपना’ नहीं है
फिरभी खूली आंखोसे कभी देख ना पाई.

सपना विजापुरा
३-१७-२०११

4 Mar 2011

दोस्त

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दोस्त भी दुश्मन निकले

प्यारमे  मतलब  निकले

जिदंगीका कयां हो यकीं

सपने भी बनझर निकले.


सपना विजापुरा

29 Nov 2010

आज़ कविता नहीं बनेगी!!

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बाज़ुके कमरेमे  पिताज़ीकी खांसनेकी आवाज़

उनके बाज़ुमें दमेकी बिमारीसे हांफती मां

आज़ कविता नहीं बनेगी

आधा पेट भरके कामपे गया हुआ पति

आधा पेट भरी हुई कलेज़ेके टूकडेको

सुकी छातीसे दूध पीलानेकी कोशीषमे वोह

आज़ कविता नहीं बनेगी.

चुल्हेकी राखको फूकके जलानेकी कोशीषमे

धूएके बहानेसे आंखे पोंछती  वोह..

आज़ कविता नहीं बनेगी

पाठशालासे फटे गंदे कपडेमे लपेटी

सुखी आंखे सुखा पेट..

मां ने ढका हुआ फिर भी

ज़ीसके उपर मख्खीया घुमराती है

ऐसा खाना खाने चली..

आज़ कविता नही बनेगी..

कविता तो होती है सपनोकी दुनिया

यहां कोइ सपना पूरा होनेवाला नही

आज़  कोइ कविता नही बनेगी..

सपना विजापुरा

24 Nov 2010

महोबत

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तेरी यादसे दूर नहीं रहे सकते
ऐसी बेवफाई नही कर सकते
चाहो तो आज़मा लो हमे तूम
तूमसे बिछडके जी नहीं सकते

मनो मिट्टीके नीचे  जाके सो गये अब
चहेकते  थे  बोलते बंध हो गये अब
अब जैसे मुहमे जबान ही नही है मानो
ऐसे खामोश है वोह की रो गये अब


तेरा और मेरा कॉई रिश्ता नहीं
फिरभी दिल तुज़े भूलता नहीं
दिल समजानेसे समज़ता नहीं
ज़हेनकी बात पगला  मानता नहीं


कितना भी कर लो यह महोबत जीतनेवाली नहीं
और यह दुनिया है जो कभी हारनेवाली  नहीं
मौतकी मंज़िल तक पहोंचाके छोडेंगी यह दुनिया
पर यह महोबत है जो कभी घटनेवाली नहीं

सपना विजापुरा

13 Oct 2010

सपने

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कभी तुजे इतना करीब पाती हुं
के हाथ बढाके अभी छू लुंगी तुजे
अब नहीं तन्हाई तडपाती मुजे
अब तेरे बगैर ही जी लुंगी मैं


तुमने ऐसे रंग भरे है जीवनमे
मुस्कुरुहाटसी रहेती है चहेरेपे
पतझडमे भी फूल खील गये है
पंछी चहेकने लगे है चमनमे

तेरी यादको न दुनियाका डर
तेरी यादको न मज्ञहबका डर
वो तो बेधडक चली आती है
एक तुं है जो कभी नही आता

छोटे छोटे सपने है मेरे
नन्हे मुन्हे सपने है मेरे
कही निन्द्से न जाग जाउ
बहोत ही नाज्ञुकसे सपने है मेरे

सपना विजापुरा