7 Feb 2012
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तूजेह बनाया गया है मेरे लीये
8 Oct 2011
तन्हाइयां
तेरी चाहत मिले मुजेह यह मेरा नसीब नहीं
मेरी चाहत मिले तुजेह यह तेरा नसीब नहीं
खुदाने बनाये अपने अपने नसीब मुख्तलिफ
न तुं मेरा नसीब है न मै तेरा नसीब हुं
जब शामके रंग उतर चुके तब आये
जब रातके अंधेरे उतर आये तब आये
आंखोने इन्तेजार छोड दिया तब आये
जब आरज़ुने दम तोड दिया तब आये
लोग कहते है सुननेकी आदत डाल
दिल हि दिलमे रोनेकी आदत डाल
अल्फाज़ खंज़रकी तरह उतरते है सिनेमे
मुर्दा बनके तुं जिनेकी आदत डाल
जिनकी सुबह आंसुओसे शुरु होती है
जिनकी शाम अंधेरोमे खो जाती है
कहिये ऐसे लोग कहा जाते होगे?
जिनकी जिंदगी बेवज़ह गुज़रती है
ख्वाबोके ताज़महल तूटते लब्ज़ोसे
रिश्तोके शिशमहल तूटते लब्ज़ोसे
‘सपना’ तुं बस खमोश हो जा अब
दिलोके नाज़ुक तार तूटते लब्ज़ोसे
सज़देसे सर नहीं उठाउंगी
मै खाली हाथ नहीं जाउंगी
ऐ खुदा तुं है करीम बडा
करम कर वरना मर जाउंगी
सपना विजापुरा
१०-०७-२०११
22 Jun 2011
महोबत
अब नहीं है तेरा ईन्तेज़ार
अब नहीं है यह दिल बेकरार
क्या कही धडकन बंध हो गई
अब नहीं है सांसोकी रफतार
दिल जब बसमे नहीं तो कोई क्या करे?
जब तुमसे महोबत है तो कोई क्या करे?
पता है कभी भी न होगा अपना मिलन
फिर भी दिल तुम्हे मांगे तो कोई क्या करे?
भीनी भीनी बारिश सी तेरी याद
खुश्बुकी तरह महेकती तेरी याद
जैसे कोई जन्नतकी गलीयोसे गुज़्ररे
पंछीकी तरह चहेकती तेरी याद.
मधूर मधूर है अपने रिश्ते
दिलको बहेलाते है यह रिश्ते
दिलको सेहलाते है यह रिश्ते
मीठे मीठे मुलायमसे रिश्ते.
तुं नज़रके सामने नहीं फिरभी
तेरी तस्वीर दिखाई देती है
अब नही मौतका डर मुज़ेह
मौतमे जिंदगी दिखाई देती है
तुं नही है तो क्या है
तेरी याद तो साथ है
एक यह चीज़ है जीसे
कोई नही छीन सकता है.
सपना विजापुरा
६-२१-२०११
19 Apr 2011
छोड दिया
तुजेह चाहके चाहना छोड दिया
किसीको अपना मानना छोड दिया
अब क्यां लेना देना हैं सांसोसे
जीते जी मैने भी जीना छोड दिया
तेरी चहेक जो गई जिंदगीसे
परिंदोने भी गुनगुना छोड दिया
तुं जहां है बस खुश ही होगा,
तेरे बारेमे पूछना छोड दिया
जबसे मिला है जामे कवसर
हमने मयखाना छोड दिया
मरज़ीके मुताबिक क्यां होगा
सपनाने दिलको डाटना छोड दिया..
सपना विजापुरा
४-१८-११
28 Mar 2011
सिराते मुस्तकीम
ऐ खुदा तु है मेरी रगे-जां तक
बात मेरी पहोंची है आसमां तक
क्या करु मीन्नते गुज़ारिशे मै
जान लेता है मेरे दिलकी बात तक
मेरे खुदा तेरी शानका क्या केहना?
ज़मीन तेरी हकुमत तेरी आसमान तक
तु ही बता क्या करु तुज़ेह रीझानेको
फरीश्तोको केह दो ले जाये जन्नत तक
नहीं टाल सकती तेरी कोई बात ऐ खुदा
ईश्क है मुज़ेह तुमसे इन्तेहा तक
गर्दिशोमे है तु ही पार लगाना इसे
तु ही पतवार है मेरी कश्तीका किनारे तक
सब भले छोडके जाये मुज़ेह तन्हा
तु ना छोडेगा मुज़ेह भरोसा है गले तक
नहि पता है मुज़ेह भला क्या बुरा क्या
पकड सपनाकी उंगली सिराते मुस्तकीम तक
सपना विजापुरा
सिराते मुस्तकीम= मंज़ीले मक्सुद= सीधा रस्ता
18 Mar 2011
दर्द
कयामतमे होंगी मुलाकात हमारी
खूब गीले शीकवे करुंगी अल्लाहसे
तब पूछुंगी तडपना मेरी किस्मत थी
या फिर तडपाना उनकी फितरत?
क्यों तेरी तस्वीर सामनेसे हटती नहीं
तेरे बीना अब तो जिंदगी गुज़रती नहीं
माना तुज़े चाहके बडा गुनाह किया है
फिरभी तेरी महोबत दिलसे मिटती नहीं
दिलमे एक दर्द सा रहेता है
दिल कबसे बेकरार सा है
मिटती नही है दिलकी खलीश
यह मर्ज़ लाईलाज़ सा लगता है
जो कभी हुआ नहीं उसे भूला ना पाई
जो कभी होना नहीं उसकी तमन्ना है
तुं हकीकत है कोई ‘सपना’ नहीं है
फिरभी खूली आंखोसे कभी देख ना पाई.
सपना विजापुरा
३-१७-२०११
4 Mar 2011
दोस्त
दोस्त भी दुश्मन निकले
प्यारमे मतलब निकले
जिदंगीका कयां हो यकीं
सपने भी बनझर निकले.
सपना विजापुरा
29 Nov 2010
आज़ कविता नहीं बनेगी!!
बाज़ुके कमरेमे पिताज़ीकी खांसनेकी आवाज़
उनके बाज़ुमें दमेकी बिमारीसे हांफती मां
आज़ कविता नहीं बनेगी
आधा पेट भरके कामपे गया हुआ पति
आधा पेट भरी हुई कलेज़ेके टूकडेको
सुकी छातीसे दूध पीलानेकी कोशीषमे वोह
आज़ कविता नहीं बनेगी.
चुल्हेकी राखको फूकके जलानेकी कोशीषमे
धूएके बहानेसे आंखे पोंछती वोह..
आज़ कविता नहीं बनेगी
पाठशालासे फटे गंदे कपडेमे लपेटी
सुखी आंखे सुखा पेट..
मां ने ढका हुआ फिर भी
ज़ीसके उपर मख्खीया घुमराती है
ऐसा खाना खाने चली..
आज़ कविता नही बनेगी..
कविता तो होती है सपनोकी दुनिया
यहां कोइ सपना पूरा होनेवाला नही
आज़ कोइ कविता नही बनेगी..
सपना विजापुरा
24 Nov 2010
महोबत
तेरी यादसे दूर नहीं रहे सकते
ऐसी बेवफाई नही कर सकते
चाहो तो आज़मा लो हमे तूम
तूमसे बिछडके जी नहीं सकते
मनो मिट्टीके नीचे जाके सो गये अब
चहेकते थे बोलते बंध हो गये अब
अब जैसे मुहमे जबान ही नही है मानो
ऐसे खामोश है वोह की रो गये अब
तेरा और मेरा कॉई रिश्ता नहीं
फिरभी दिल तुज़े भूलता नहीं
दिल समजानेसे समज़ता नहीं
ज़हेनकी बात पगला मानता नहीं
कितना भी कर लो यह महोबत जीतनेवाली नहीं
और यह दुनिया है जो कभी हारनेवाली नहीं
मौतकी मंज़िल तक पहोंचाके छोडेंगी यह दुनिया
पर यह महोबत है जो कभी घटनेवाली नहीं
सपना विजापुरा
13 Oct 2010
सपने
कभी तुजे इतना करीब पाती हुं
के हाथ बढाके अभी छू लुंगी तुजे
अब नहीं तन्हाई तडपाती मुजे
अब तेरे बगैर ही जी लुंगी मैं
तुमने ऐसे रंग भरे है जीवनमे
मुस्कुरुहाटसी रहेती है चहेरेपे
पतझडमे भी फूल खील गये है
पंछी चहेकने लगे है चमनमे
तेरी यादको न दुनियाका डर
तेरी यादको न मज्ञहबका डर
वो तो बेधडक चली आती है
एक तुं है जो कभी नही आता
छोटे छोटे सपने है मेरे
नन्हे मुन्हे सपने है मेरे
कही निन्द्से न जाग जाउ
बहोत ही नाज्ञुकसे सपने है मेरे
सपना विजापुरा
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