13 Apr 2013

मुजेह ले चलो

Posted by sapana

Minolta DSC

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहा
वफाके नामपे लोग मरते है जहांं

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहांं
महोबतके नामसे जानसे जाते है जहांं

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहां
दिलोको ना कुचले जाते है जहां

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहां
आंसुओको मोती समज़े जाते है जहां

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहां
औरतको लोग देवी माने है जहां


मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहांं
जिन्दा इन्सानोको जिन्दा जाने है जहां

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहा
बेटियोके दामन चाक ना होते है जहां

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहां
धर्मके नामपे इन्सान ना काटे जाते हो जहां

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहां
बंदे और खुदा मिल जाते है जहां

मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहां
सपनाके सपने सच्चे होते है जहां

सपना सपना

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8 Responses to “मुजेह ले चलो”

  1. Dear Sapanaben,

    What a deeply moving gazal ! It is a tahomatnama on the reality of the world and the world where you would like to be! You have done a great job. Please see someone can sing with music !

    With best wishes and good luck for more such gazals showing the reality of the world and the ideal world you would like to be in.

    Dinesh O. Shah, Gainesville, FL, USA

     

    Dr. Dinesh O. Shah

  2. Very touchy and nice.
    Saryu

     

    SARYU PARIKH

  3. मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहा
    जिन्दा इन्सानोको जिन्दा जाने है जहा
    बहोत अच्छी रचना आपके भीतर से जगी और पढ़ी सभी पंक्तिया बेहतर लगी ..
    मक्ता भी बहोत अच्छा ..सरलता से अंतर्की सच्ची मांग निकली है .. जो कौन नहीं चाहता ..?

     

    dilip

  4. मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो जहां
    धर्मके नामपे इन्सान ना काटे जाते हो जहां

    मुजेह ले चलो मुजेह ले चलो वहां
    बंदे और खुदा मिल जाते है जहां

    सुंदर
    पर्शियन में इसका मुजेह , मोजाह या मोजः रूप मिलता है जिसका अर्थ होता है पैरों से ऊपर पिण्डलियों तक पहना जाने वाला एक कपड़ा । इसे पायताबा भी कहते हैं और जुराब भी । यह दिलचस्प है कि मुक्त, अनावरण, खोलना, बन्धन मुक्त करना जैसे भावों वाली मुच् धातु से बने शब्दों के रूपान्तर मोजा, मोजड़ी जैसी संज्ञाएँ बनीं जिनमें आवरण या कवर का भाव आता है ।

     

    pragnaju

  5. “सपनाके सपने सच्चे होते है जहा”
    बिलकुल ज़रूर हक़ीक़त बनेगा एक रोज़ ये सुन्दर सपना
    दिल की गॆहराई से लिखी एक आरज़ू सुन्दर रचना

     

    Kalimullah

  6. नवीनतायुक्त गझल बहुत अच्छी लगी

     

    kishore modi

  7. Wah Sapanaji bahot khoob.Likh te rahiye.

     

    Shenny Mawji

  8. अच्छी रचना…!!

     

    અશોક જાની 'આનંદ'

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