7 Dec 2012

सराब कोइ

Posted by sapana

उन आंखोकी लाये ताब कोई
पा सकु ना है वोह सराब कोइ

मदभरी उन आंखोमे है नशासा
जैसे सागरमे हो  शराब कोइ

बुत परस्ती भी चाहे मै कर लु
है खुदाका मगर जवाब कोई

उंगलीयोपे जो गिन रहे है गुनाह
उनका भी तो करे हिसाब कोई

कत्ल्का जाल बिछ गया हर सुं
खल्कपे देख ले  अज़ाब कोइ

खूली आंखोका सपना है देखो
कभी आये बनके ख्वाब कोई

सपना विजापुरा

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8 Responses to “सराब कोइ”

  1. हिन्देीमेँ अच्छी कोशिश…!!

     

    Ashok Jani 'Anand'

  2. उन आंखोकी लाये ताब कोई
    पा सकु ना है वोह सराब कोइ
    मदभरी उन आंखोमे है नशासा
    जैसे सागरमे हो शराब कोइ
    माशा अल्लाह
    याद
    मैं भी तुझ से बिछड़ के सर-गर्दां
    तेरी आँखों में भी नमी है अभी

    मैं ने माना बहुत अन्धेरा है
    फिर भी थोड़ी सी रोशनी है अभी

     

    pragnaju

  3. प्रिय सपना,
    हरेक कविता पढी. बहूत अच्छी. खास करके ‘महोबत.’ प्यारसे लिखते रहीये.
    सरयू

     

    SARYU PARIKH

  4. उन आंखोकी लाये ताब कोई
    पा सकु ना है वोह सराब कोइ
    मदभरी उन आंखोमे है नशासा
    जैसे सागरमे हो शराब कोइ
    सपनाजी, उर्दुमें भी काफी अच्छी तरह से आप गझल लीखते हो..
    और भी ज्यादा लीख्ते रहीए और शेर करेते रहे यही कामना है.

     

    dilip

  5. Subhanallah Bahot Khub

     

    Shenny Mawji

  6. उर्दु मे गझल लिख्न ओर साथ मे गुजरति ओर हिन्दि मे लिख न ओर भि मुस्किल है मगर विशय वस्तु के आधरित सब्दो को पध्नेवलो को मध्य नझर रख्तेहुवे लिख्न ओर भि मुस्किल है…फक्र है एसि सपजि जन फरियद के साथ है…बहोत ध्न्यवद्….

     

    pradip raval



  7. ✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥
    ♥सादर वंदे मातरम् !♥
    ♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿


    मदभरी उन आंखो में है नशा-सा
    जैसे सागर में हो शराब कोई

    आऽऽहा हाऽऽऽ हऽऽऽ !
    बहुत ख़ूबसूरत !
    उंगलीयोपे जो गिन रहे है गुनाह
    उनका भी तो करे हिसाब कोई

    बेहतरीन !

    आदरणीया सपना जी
    आपके यहां आ कर बहुत ख़ुशी हुई …
    आपकी कई रचनाएं पढ़ीं ,
    …अच्छा लिखती हैं आप !
    …आपकी लेखनी से सुंदर रचनाओं का सृजन ऐसे ही होता रहे, यही कामना है …

    नव वर्ष के लिए शुभकामनाएं !
    साथ ही
    हार्दिक मंगलकामनाएं …
    लोहड़ी एवं मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर !

    राजेन्द्र स्वर्णकार
    ✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿

     
  8. sapna really wonderful poems,gazals n shayaries.
    i read your all three blogs. keep it up . my best wishes 4 youu.

     

    kalyani vyas

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